चाय के साथ-साथ कुछ कवितायें भी हो जाये तो क्या कहने...

Thursday, January 3, 2008

तस्वीर तुम्हारी


-दिल के कोरे कागज पर-

-खींचकर कुछ आड़ी-तिरछी लकीरें-

-जब देखती हूँ...

-बन जाती है तस्वीर तुम्हारी-

-और लगता है कागज़ का वह टुकड़ा-

-कह रहा हो मुझसे-

-मै तो बसा हूँ दिल में तुम्हारे-

-क्यों कागज पर उतारा है?

-देखो बेरहम दुनियाँ जला न दे-

-देखो कहीं हवा उड़ा न दे-

-और घबरा कर मै समेट लेती हूँ-

-वो तस्वीर तुम्हारी....


-जब सुबह का सूरज-

-अपनी रौशनी फ़ैलाये-

-मेरी खिड़की से झाँकता है-

-मुझे नजर आते हो तुम-

-अपनी इन्द्र-धनुषी बाँहे फ़ैलाये-

-और मेरे चेहरे से छूती-
-तुम्हारी बाँहे-

-जगा देती है मुझे-

-तुम्हारे अहसास के साथ-

-सचमुच तुमसे मिलकर जिन्दगी-

-एक कविता बन गई है-

-और मै एक कलम-

-जो हर वक्त-

-तुम्हारे प्यार की स्याही से-

-बनाती है तस्वीर तुम्हारी...।
सुनीता(शानू)

21 comments:

  1. मीनाक्षीJanuary 4, 2008 at 1:32 AM

    और मै एक कलम
    जो हर वक्त
    तुम्हारे प्यार की स्याही से
    बनाती है तस्वीर तुम्हारी
    --बहुत खूबसूरत भाव...

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  2. बडे दिन बाद दिखी। नए साल की शुभकामनाएं।

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  3. 2007 के बाद अब 2008 मे दिखीं आप माने साल भर बाद और वह भी किसी को याद करते हुए!
    क्या बात है!
    बढ़िया कविता!!
    नव वर्ष की शुभकामनाएं

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  4. आपको एवं आपके परिवार को अंग्रेजी नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें । सुन्‍दर रचना, वाह ! किसी की तस्‍वीर नें आपको कवित्री बना दिया । गहरे भाव को सुन्‍दर शव्‍दों में पिरोया है ।
    बडे दिनो बाद आपने पोस्‍ट लिखा शायद इसलिए आपके समीक्षक मित्रों की टिप्‍पणिया अभी आ नहीं पाई । मैं कल रात से आपके ब्‍लाग में कई बार आकर देख रहा हूं कि बंधुओं के टिपियाने के बाद टिपियाउंगा ।

    संजीव

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  5. भावो. से परि-पूर्ण रचना । आपको नव-वर्ष की शुभ कामनाएँ ।

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  6. ्वाह! नये साल की शुभ कामनाएं

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  7. "सचमुच तुमसे मिलकर जिन्दगी-
    -एक कविता बन गई है-
    -और मै एक कलम-"

    मूर्त -अमूर्त मोहब्बत की अनवरत एक फिजा सी बना डाली है आपने आपनी लेखनी से ,सुनीता जी.

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  8. सचमुच तुमसे मिलकर जिन्दगी-
    -एक कविता बन गई है-
    -और मै एक कलम-"
    bahut sunder
    badhia vaapsi aise hi likhte rahiye

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  9. सुंदर कविता..
    अति सुंदर भाव....
    भावों को बिंबों के माध्यम से चित्रित करती..
    आप को सपरिवार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ..

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  10. वाह शानू जी,

    और मै एक कलम
    जो हर वक्त
    तुम्हारे प्यार की स्याही से
    बनाती है तस्वीर तुम्हारी

    बहुत बढिया.. सुन्दर रचना

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  11. bahut achchee kavita hai sunita ji,aap ko anubhuti par bhi pada-badhayee aur naye saal ki shubhkamnayen

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  12. apki kavita pasand aaye

    best of luck
    apka
    -roshan premyogi

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  13. बहुत सुन्‍दर । शुभकामनायें।

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  14. Hello. This post is likeable, and your blog is very interesting, congratulations :-). I will add in my blogroll =). If possible gives a last there on my site, it is about the CresceNet, I hope you enjoy. The address is http://www.provedorcrescenet.com . A hug.

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  15. Very touchy and sentimental !
    I liked it.!!

    Aap likhti rahen aur ham padhte rahen ... yehi to hai hamara vada..!!

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  16. शानू जी,

    सुन्दर भाव बरी कविता है... प्यार की स्याही से बनाई हुई तस्वीर कभी नहीं मिट सकती... ये तो समय के साथ साथ और पक्की और अमिट हो जाती है.

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  17. suneetaa jee,
    kamaal kar diyaa aapne ! is rachnaa men aap anubhootiyon aur abhivyakti ke naye shikhar par jhanDaa gaaD chukee hain. rachnaa padhte huye main stabdh rah gayaa........ kyaa khoob likhaa hai aapne-! wah wah

    anandkrishan, jabalpur
    9425800818

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  18. वो तस्‍वीर तुम्‍हारी... बहुत लाजवाब कविता है,पढकर अच्‍छा लगा।

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स्वागत है आपका...