चाय के साथ-साथ कुछ कवितायें भी हो जाये तो क्या कहने...

Friday, July 10, 2020

अंतिम सत्य

6 comments:

  1. प्रेम को तलाशते नए अन्दाज़ ...
    पर शायद प्रेम दोनो में है थोड़ा थोड़ा ... वजह में और स्वार्थ में ..

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  2. वाह बहुत ही बढ़िया
    अंतिम पंक्ति तो वाह

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  3. ओह ,वजहें मार देती हैं , उफ़ उफ्फ्फ | बहुत ही कमाल

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  4. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 11 जुलाई 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  5. सच है ज़रूरतें स्वार्थी बना देती है। बहुत सुन्दर भाव।

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स्वागत है आपका...

अंतिम सत्य