चाय के साथ-साथ कुछ कवितायें भी हो जाये तो क्या कहने...

Monday, November 2, 2009

आ गई कुछ यादें चुपके से...

यूँ हीं आई जब याद बात कोई तो कागज़ पर कलम फ़िर चल पड़ी....





















आधी बात कही थी तुमने


और आधी मैने भी जोड़ी

तब जाकर बनी तस्वीर

सच्ची-झूठी थोड़ी-थोड़ी

नटखट सी बातों के पीछे

दुनिया भर का प्यार छुपा

मुस्काती आँखो ने भी

जाने कितने स्वप्न दिखा

लूटा था भोला-सा बचपन

और मिला जब

पहला-पहला खत तुम्हारा

तुड़ा-मुड़ा, कुछ भीगा-भागा

भोर के स्वप्न सा

आधा सोया, आधा जागा

कैसे तुमने ओ लुटेरे

दिल को चुराया चुपके से

न दस्तक न आहट ही

दिल में मचाया शोर

चुपके से...



सुनीता शानू

56 comments:

  1. मोहब्बत में भीगा ख़त सा जान पड़ता है
    बहुत खूबसूरत

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  2. बहुत सुन्दर दिल को छूती अच्छी रचना . आभार

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  3. कैसे तुमने ओ लुटेरे
    दिल को चुराया चुपके से

    रूमानी और बहुत नाजुक सी रचना.
    बहुत सुन्दर

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  4. कैसे तुमने ओ लुटेरे
    दिल को चुराया चुपके से
    न दस्तक न आहट ही
    दिल में मचाया शोर
    चुपके से...

    लुटेरे चोर तो शोर चुपके से ही मचाएंगे ना ...!!

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  5. तुड़ा-मुड़ा, कुछ भीगा-भागा


    ओए होए..क्या याद किया है वो गुजरा जमाना...तासीर आज भी ताजी नजर आई..ये बात हुई न. बहुत खूब!! बधाई.

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  6. दिल को चुराया चुपके से
    न दस्तक न आहट ही

    खूबसूरत शब्दों से रची आपकी ये रचना बहुत अच्छी है...बधाई...
    नीरज

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  7. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है।
    श्री गुरू नानकदेव जी की 540वीं जयन्ती की और
    कार्तिक पूर्णिमा (गंगा-स्नान) पर्व की बधाई!

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  8. bahut hi pyari kavita k liye vadhaai.....

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  9. बहुत खूबसूरत, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  10. संवेदनाओं से प्रोत आपकी रचना अच्छी लगी.

    आकाश

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  11. प्यार में डूबती उतराती कविता । बहुत दिनों बाद आपके ब्लॉग पर आई । आपके पति की शीघ्र पुनश्च स्वस्थ हों इस कामना के साथ ।

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  12. ख़ूबसूरत कविता है..प्यारे अहसासों से लबरेज़

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  13. हर पल कल कल बहते
    अहसासों के र्निझर को

    बांधो ना यादों में

    आज अभी भी कुछ ताजा सा

    हो ही रहा है


    चखो नि‍त नूतन नया क्षण

    कोई है जो सनातन
    जीवन सा

    संजो ही रहा है

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  14. shabd-shabd khoobsurat..
    bhaav sapno ke rangoN meiN
    doobe hue....
    ek asardaar prastutee . . .

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  15. @ दिल में मचाया शोर
    चुपके से...

    बहुत वाचाल पंक्तियाँ हैं !

    हम हैं कि इनको समझा रहे हैं, एक एक कर बात कहो। ऐसी बतियाती कविता बस ऐसी लगती है जैसे घर घर की दुलारी बिटिया हो ।

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  16. बहुत खूब सुनीता जी ....ये शोर मुबारक आपको ........!!

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  17. बहुत सुन्दर दिल को छूती अच्छी रचना

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  18. shabnam मैं bheege शब्द से rachi है ........ प्रेम की bheeni mahak सी uth रही है rachna से ........... बहुत ही lajawaab लिखा है .......

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  19. chai ke saath kavita or kavita me chai mera priya vishay raha hai sunita ji.
    kabhi likha bhi tha
    "khayal e yaar ki har ibtida to yak si thi
    naseem e subh kuch akhbaar or awdhesh ki chai" .

    satya vyas

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  20. behtreen kavita, dil ke aas-pass
    badhaie aapko
    gaurav vashisht

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  21. कैसे तुमने ओ लुटेरे

    दिल को चुराया चुपके से

    न दस्तक न आहट ही

    दिल में मचाया शोर

    चुपके से...


    di.........in panktiyon ne man moh liya....... behtareen shabdon ke saath ek bahut hi behtareen kavita...

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  22. कैसे तुमने ओ लुटेरे
    दिल को चुराया चुपके से..
    और तब से ही बैठे हो दिल में..
    अधिकार जमाए....

    very nice...congrats..

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  23. बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में
    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  24. Khubsurat ehsason ki sunder kavita...badhai aapko.
    blog par aane ka bhaut bahut shukriya shanu ji!

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  25. बहुत अच्छी रचना
    बहुत-2 आभार

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  26. It is very nice poems. You can send this for publishing. address avilable on my blog. please visit us-
    http://katha-chakra.blogspot.com

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  27. पहला-पहला खत तुम्हारा

    तुड़ा-मुड़ा, कुछ भीगा-भागा

    भोर के स्वप्न सा

    आधा सोया, आधा जागा

    कैसे तुमने ओ लुटेरे

    दिल को चुराया चुपके से

    न दस्तक न आहट ही

    दिल में मचाया शोर

    चुपके से...



    khat padh kar man bheeg gaya
    bahut khoobsurat
    aasha hai aap aur aapka parivaar sakushal hai

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  28. खूबसूरत शब्दों से रची आपकी ये रचना बहुत अच्छी है...बधाई...

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  29. आधी बात कही थी तुमने
    और आधी मैने भी जोड़ी ...
    isi samanvay ko hi pyar kahte hai. bahut sunder rachna.

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  30. bhut pasan aaya .... kiya kaku apaki tarif may

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  31. Please read my blog and let me know what you think!

    http://bestvacationdestinations.blogspot.com/

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  32. आधी बात कही थी तुमने


    और आधी मैने भी जोड़ी

    तब जाकर बनी तस्वीर

    सच्ची-झूठी थोड़ी-थोड़ी
    really a nice work in simple words.......

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  33. chupke chupke man ka pakheru yaadon me dubki laga aataa hai , bahut sundar .

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  34. बहुत खूबसूरत
    खूबसूरत शब्दों से रची आपकी ये रचना बहुत अच्छी है..

    आप ने अपने फोटो को केसे तथा किस सॉफ्टवेर से बनाया है मुझे मेल कर के बताये
    cs3.vijay@gmail.com

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  35. आधी बात कही थी तुमने और आधी मैने भी जोड़ी
    .
    बहुत सुन्दर गीत है।रचना मे पूर्ण अभिव्यक्त किया है ,जो शब्दचित्र उभारे है
    बे शसक्त है ।
    बधाई.

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  36. आधी बात कही थी तुमने और आधी मैने भी जोड़ी
    .
    बहुत सुन्दर गीत है।रचना मे पूर्ण अभिव्यक्त किया है ,जो शब्दचित्र उभारे है
    बे शसक्त है ।
    बधाई.

    ReplyDelete
  37. आधी बात कही थी तुमने और आधी मैने भी जोड़ी
    .
    बहुत सुन्दर गीत है।रचना मे पूर्ण अभिव्यक्त किया है ,जो शब्दचित्र उभारे है
    बे शसक्त है ।
    बधाई.

    ReplyDelete
  38. अच्‍छी लगी आपकी रचना

    प्रणाम स्वीकार करें

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  39. मोहब्बत भरी कविता.. काफी अच्छी थी..

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  40. dil mein machaaya shor chupke se...

    umdaa....aafareeen....behtareen...

    aabhaar!

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  41. great feeling.parmanent memory
    Just like my frist love letter.
    10th class
    board exam
    saboo school
    1987.

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  42. कैसे तुमने ओ लुटेरे

    दिल को चुराया चुपके से

    न दस्तक न आहट ही

    दिल में मचाया शोर

    चुपके से...
    बहुत ही खुबसुरत पंक्तीया!!!बहुत सुंदर!!!

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  43. bhut sundar geet hai ,aadhi baat kahi hai tumne ,or aadhi mene jordi

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  44. पूर्णता.और प्रेम में सराबोर सुन्दर रचना....

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  45. कैसे तुमने ओ लुटेरे
    दिल को चुराया चुपके से
    न दस्तक न आहट ही
    दिल में मचाया शोर
    चुपके से...
    ..ati sundar sunita ji
    ..bahut din se koi post nahi.. sab thik hai na?

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  46. This comment has been removed by the author.

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स्वागत है आपका...