चाय के साथ-साथ कुछ कवितायें भी हो जाये तो क्या कहने...

Thursday, March 27, 2008

पलकें बंद हो गई...


आँखों ने आँखों से कह दिया सब कुछ

मगर जुबाँ खामोश रही...

जब दिल ने दिल की सुनी आवाज़

धड़कन खामोश रही...

आँखो के रास्ते दिल में उतरने वाले

ऎ मुसाफ़िर

अब बाहर जा नही सकते

तुम्हारे प्यार की खुशबू से तृप्त

उठती गिरती साँसे देख कर

अब पलके बंद हो गई...

सुनीता शानू

18 comments:

  1. आँखों ने आँखों से जब कहा कुछ
    जुबाँ खामोश रही...
    बहुत सुंदर कविता लगी बधाई

    ReplyDelete
  2. आँखो के रास्ते दिल में उतरने वाले

    ऎ मुसाफ़िर

    अब बाहर जा नही सकते

    तुम्हारे प्यार की खुशबू से तृप्त

    उठती गिरती साँसे देख कर

    अब पलके बंद हो गई...
    bahut hi sundar ehsas hai is kavita ka.simply beautiful.

    ReplyDelete
  3. बेहतरीन!!! उम्दा-क्या बात है!

    ReplyDelete
  4. वाह वाह !!
    क्या खूबसूरती से बयां किया है।
    और फोटो भी बहुत ही अच्छी लगी।

    ReplyDelete
  5. अति सुन्दर। बहुत खूब। सच ही कहा है किसी ने कि ये आंखे होती है दिल की ज़ुबान। सुनिता, सच में तुम्हारी हर कविता की अपनी ज़ुबान होती है

    रमेश

    ReplyDelete
  6. अभिव्यक्ति सुन्दर है

    ReplyDelete
  7. सुनीता जी, आपकी यह रचना आकार में बहुत छोटी होते हुए भी संप्रेषण की दृष्टि से एक समग्र व सार्थक रचना है. इस रचना के अभिधेयार्थ में ही इसके समस्त व्यंग्यार्थ भी निहित हैं. शब्द असीम शक्ति के संवाहक होते हैं और उनमें छिपी ऊर्जा का का संसाधन कर पाना एक साधना है. आपकी साधना फलीभूत हो रही है. आपके शब्द अब अपने अर्थ विस्तरित कर निस्सीम नभ में ऊंची परवाज़ करने लगे हैं. आपके ब्लॉग का नाम "मन पखेरू उड़ चला" अब सार्थक व चरितार्थ हो उठा है.
    एक साहित्यिक किंवदंती है की जो रचनाकार एक सार्थक व सम्पूर्ण बिम्ब व प्रतीक की खोज कर लेता है उसका कवित्व सफल हो जाता है. उसके द्वारा की गई जीवन की व्याख्याएँ दिशा-दर्शन करती हैं. रचनाकार की समग्र रचनाधर्मिता ही इसी आधार पर निर्भर है. आपकी रचना जीवन के एक रूप, पक्ष और आयाम को सुपरिभाषित करने में कामयाब है. अपनी ऊर्जा को बनाए रखें. शुभकामनाओं सहित-
    anandkrishan@yahoo.com

    ReplyDelete
  8. चित्र ने आपके
    सब कुछ कह दिया
    आपने जो कहा
    तो सब सर्द हो गया
    जमाना बेदर्द हो गया.

    ReplyDelete
  9. सुनीता जी वाह कया सुन्दर कविता हे,हर पक्ति दिल के करीब हे, बहुत धन्यवाद

    ReplyDelete
  10. 'अब पलकें बन्द हो गईं' और आपकी कविता दिल में उतर गई... बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  11. "तुम्हारे प्यार की खुशबू से तृप्त

    उठती गिरती साँसे देख कर

    अब पलके बंद हो गई"...

    ReplyDelete
  12. "तुम्हारे प्यार की खुशबू से तृप्त

    उठती गिरती साँसे देख कर

    अब पलके बंद हो गई"

    मोहक रुमानियत लिए है आपकी रचना..

    ReplyDelete
  13. "तुम्हारे प्यार की खुशबू से तृप्त

    उठती गिरती साँसे देख कर

    अब पलके बंद हो गई"

    मोहक रुमानियत लिए है आपकी रचना..

    ReplyDelete
  14. shanoo ji, rng bolte hain...bahut der tk dekhta rha...ki sunta rha...kya, kya bataoon ki kya..?

    ReplyDelete
  15. बहुत सुंदर चित्र खींचा है आपने शब्दों के माध्यम से. सरल लेकिन मन छू लेने वाली रचना है. बधाई स्वीकार करें

    आकाश

    ReplyDelete
  16. गोया की .......कविता पढूं या इस चित्र को देखूं ....
    दोनों अपने आप मे एक कविता है........

    ReplyDelete
  17. चार पंक्तियों में वजन आ गया है..बेहद खूबसूरत..

    ReplyDelete

स्वागत है आपका...