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चाय के साथ-साथ कुछ कवितायें भी हो जाये तो क्या कहने...

Saturday, 22 March, 2008

फ़ागुन आया झूम के...

दोस्तों होली का त्यौहार आप सबके जीवन में खुशियाँ लाये यही मनोकामना है...

भंग की तरंग

ढोलक और मॄदंग

होली के रंग

नाचे संग-संग .....




फ़ागुन के दोहे


डाल-डाल टेसू खिले,आया है मधुमास,
मै हूँ बैठी राह में,पिया मिलन की आस।
हो रे पिया मिलन की आस



फ़ागुन आया झूम के ऋतु वसन्त के साथ
तन-मन हर्षित हों रहे,मोदक दोनो हाथ
हो रे मोदक दोनो हाथ



मधुकर लेके आ गया, होठों से मकरंद
गाल गुलाबी हो गये, हो गई पलकें बंद।
हो रे हो गई पलकें बंद



पिघले सोने सा हुआ,दोपहरी का रंग
और सुहागे सा बना,नूतन प्रणय प्रसंग
हो रे नूतन प्रणय प्रसंग



अंग-अंग में उठ रही मीठी-मीठी आस
टूटेगा अब आज तो तन-मन का उपवास
हो रे तन-मन का उपवास



इन्द्र धनुष के रंग में रंगी पिया मै आज
संग तुम्हारे नाचती , हो बेसुध बे साज
हो रे हो बेसुध बे साज



तितली जैसी मैं उड़ू चढ़ा फ़ाग का रंग
गत आगत विस्मृत हुई,चढी नेह की भंग
हो रे चढ़ी नेह की भंग



रंग अबीर गुलाल से,धरती भई सतरंग
भीगी चुनरी रंग में,हो गई अंगिया तंग
हो रे हो गई अंगिया तंग



गली-गली रंगत भरी,कली-कली सुकुमार
छली-छली सी रह गई,भली भली सी नार
हो रे भली-भली सी नार



सुनीता शानू




15 comments:

mahashakti said...

बहुत खूब दीदी,

होली की बधाई

अनूप शुक्ल said...

सही है। होली मुबारक।

सजीव सारथी said...

वाह... आपको और आपके पूरे परिवार को होली की ढेरों शुभकामनाएं

अजय यादव said...

वाह भई! बहुत सुंदर दोहे हैं. मजा आ गया.
होली की अनेकानेक शुभकामनायें!

- अजय यादव
http://merekavimitra.blogspot.com/
http://ajayyadavace.blogspot.com/
http://intermittent-thoughts.blogspot.com/

mehek said...

रंग अबीर गुलाल से,धरती भई सतरंग
भीगी चुनरी रंग में,हो गई अंगिया तंग
हो रे हो गई अंगिया तंग
bahut sundar,har rang samaya hai kavita mein,holi mubarak ho.

कंचन सिंह चौहान said...

होली की शुभकामनाएं

दीपक भारतदीप said...

सुनीता जी
आपको होली की बहुत बहुत बधाई, हमारी कामना है कि आप इसी तरह अपने शब्दों के रंग भरते हुए अपनी रचनाएं लिखतीं रहें और हम उन्हें पढ़कर आनंद उठाते रहें.

विनोद पाराशर said...

सुनीता जी,आपको भी होली की बहुत-बहुत बधाई.
शुक्र हॆ,हमारा ’कवि-सप्लाई केन्द्र’देख्नने’नया घर’तो आई.
होली पर आज के संदर्भ में,एक दोहा कहीं मॆंने पढा था-आप भी पढिये-
"लॆन्डलाईन पत्नी हुई,घीसी-पीटी सी टोन
होली में साली लगे,ज्यों मोबाईल फोन".

परमजीत बाली said...

आप को होली की बहुत-बहुत बधाई।

राज भाटिय़ा said...

सुनीता जी आप कॊ ओर आप के परिवार कॊ होली की बहुत बहुत बधाई.

Sanjeet Tripathi said...

सुंदर!!
आपको भी होली की बधाई व शुभकामनाएं

swati said...

sundar dohe

अबरार अहमद said...

बहुत सुंदर। होली की बधाई

Kavi Kulwant said...

Are wah bahut khoobsurat likhe hai.. dohe aap ne.. kamaal kar diya..
dohe dekhe aapke .. bahut khoob.. lazwaab... dil se mubarakbaad deta hun kabool pharmaayen..
dohe aur gazal me adhik phark nahi hai.. matlab aap ne gazal ek tarah se sikh li..
kavi kulwant

Dr. RAMJI GIRI said...

"तितली जैसी मैं उड़ू चढ़ा फ़ाग का रंग
गत आगत विस्मृत हुई,चढी नेह की भंग
हो रे चढ़ी नेह की भंग"

दोहे का बासंती उमंग सराबोर कर गया ...