चाय के साथ-साथ कुछ कवितायें भी हो जाये तो क्या कहने...

Friday, March 14, 2014

अधिकार या...




बनिये की बीवी बनियाईन
पंडित की बीवी पंडिताईन
या कहें कि
पति पर पत्नी का अधिकार
या फिर पत्नी को विरासत मे प्राप्त
ऎसी कुर्सी
जो मिल गई ब्याहता बनते ही
कुछ भी कहेंगें...
लेकिन 
खुद को
डॉक्टर की बीवी डॉक्टरनी
मास्टर की बीवी मास्टरनी
कहलाने वाली पत्नियाँ
उतारी जा सकती हैं
कभी भी
इस पद से
इस अस्थायी कुर्सी से
अनपढ़, गँवार, ज़ाहिल कह कर
अपमानित होकर
क्योंकि
खुद को घर, पति और बच्चों के बीच
होम करती स्त्री 
नहीं सोच पाती इतनी गहराई से
कि उसे भी चुनने होंगे
रास्ते अपने
मंजिले अपनी
स्वाभिमान के साथ
क्योंकि आज के परिवेक्ष में
गाड़ी के दोनों पहिये
हर तरह से
समान होने आवश्यक हैं।

शानू

2 comments:

  1. मुफ़्ताधिकार से आगे का चिंतन

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  2. भुलावे न रह कर, सचेत हो जाने का समय !

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