>
चाय के साथ-साथ कुछ कवितायें भी हो जाये तो क्या कहने...

Thursday, 14 February, 2008

वेलन्टाईन डे...

वेलन्टाईन डे पर संत वेलनटाईन को मेरी श्रद्धांजली....


रोक सकेगा कौन इन्हे
ये आंधी और तूफ़ान है
चल रहे है भेड़ चाल ये
आजकल के नौजवान है...

पहले पहल ये परफ़्यूम देकर
अपना प्यार दिखाते है
किस डे पर भी किस देकर
सबसे प्यार जताते है
हग डे पर भी गले मिलकर
बन जाते है अपने से
वेलन्टाईन डे पर इनके
पूरे हो जाते है सपने

प्यार घूमाना प्यार फ़िराना
प्यार ही इनका मुकाम है
रोक सकेगा कौन इन्हे
ये आँधी और तूफ़ान हैं

बीत गया समय पुराना
आज चलन है इनका
भूल गये सब रिश्ते-नाते
नया दौर फ़ैशन का
गर्ल फ़्रेंड की जी हुजूरी
यही कर्तव्य है इनका
एक छूटी दूजी बनाई
यही धर्म है इनका

माँ की डाँट पिता का पहरा
इनके लिये अपमान है
रोक सकेगा कौन इन्हे
ये आँधी और तूफ़ान है

बालो पर जो हाथ घुमाये
वो माँ इन्हे न भाती है
अनुशासन की सीख दे
वो बात इन्हे सताती है
कैसे गुरू कहाँ का चेला
सब बने संगी-साथी है
जैसी दिक्षा वैसी शिक्षा
सब गुड़-गौबर-माटी है

खुशी मनाएं वेलन्टाईन की
जिसने दिया बलिदान है
रोक सकेगा कौन इन्हे
ये आँधी और तूफ़ान है...

सुनीता शानू

15 comments:

' said...

बहुत बढ़िया शानू जी बहुत सुंदर कविता लगी धन्यवाद
kripya dekhe yamaraaj
http://mahendra-mishra2.blogspot.com

राकेश खंडेलवाल said...

अच्छा ख्याल है

Udan Tashtari said...

बेहतरीन है! :)

rajivtaneja said...

सही है सुनीता जी....हम लड़कों की तारीफ और खिंचाई एक साथ...

नीरज गोस्वामी said...

कैसे गुरू कहाँ का चेला
सब बने संगी-साथी है
जैसी दिक्षा वैसी शिक्षा
सब गुड़-गौबर-माटी है
सच्ची सीधी बात...बहुत बढिया..वाह.
नीरज

mehek said...

bahut baadhiya aur aaj ka satya likha hai sunita ji,guru ,maa,pita ke pyar se jyada girl friend ki sochte hai,valentine day ka asli arth nahi samjhte.
very truely nicely written words.

रवीन्द्र प्रभात said...

सुंदर कविता ,धन्यवाद !

Sanjeet Tripathi said...

बढ़िया!!
चलो जी वेलेन्टाईन्स डे का शुक्रिया कि इसी बहाने आप लिखती हुई तो दिखीं ;)

Reetesh Gupta said...

बालो पर जो हाथ घुमाये
वो माँ इन्हे न भाती है
अनुशासन की सीख दे
वो बात इन्हे सताती है
कैसे गुरू कहाँ का चेला
सब बने संगी-साथी है
जैसी दिक्षा वैसी शिक्षा
सब गुड़-गौबर-माटी है

अच्छी लगी आपकी कविता ...बधाई

छत्‍तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari said...

शुक्रिया, बढिया वेलेंटाईनी कविता ।

kavi kulwant said...

बहुत दिन बाद आना हुआ । आपकी कुछ रचनाओं पर आज ही टिप्पणी दी है...
इस कविता को क्या कहूँ.. हास्य / व्यंग्य.. यां शैक्षणिक... जो भी है... संदेश है..खुश रहो..

ajay kumar jha said...

shaanoo jee,
bilkul sahee farmaayaa apne aur kya khoob andaaze bayan hain

DR.ANURAG ARYA said...

chaliye aapne yad to kiya sant valentine ko,varna aadhi peedhi ko to pata hi nahi.

Udan Tashtari said...

लिखना बंद क्यूँ है आजकल??

rashtrabakti said...

माननिय सुनीताजी,

पश्चिमी संस्कृतिके अंधानुकरण पर प्रत्यघात प्रदर्शित करती ये वास्तविक्ता पुर्ण आपकी ये काव्य रचनासे
मैं अत्यन्त प्रभावीत हुआ हुं| प्रशंशावादके ईस युगमें ऐसे वास्तविक टीकापुर्ण काव्यकी रचना करनेवाले
कवि आज न्युनतम रह गये हैं| भारतकी नवयुवा पेढीके अनाचरण को प्रदर्शित करनेके लिये जो आपने
शुरवीरता प्रकटकी हैं उसके लिये आपको भिनंदन ! भारतिय संस्कृतिको ज्वलंत रखनेके अभ्यानमें आपका
ये काव्य रुपी प्रयास नवयुवाओंको जाग्रत करके नई प्रेरणा प्रदान करें ऐसी अभ्यर्थना. आप ऐसी ही कविताओंसे भविष्यमेभी भारतिय भ्रमित नवयुवानोंको हंमेशा सुचित कराति रहे ऐसी हमारी अभिलाषाके साथ शुभेच्छा एवम् शुभकामना |

हेमंतकुमार पाध्या
युनायटेड किंगडम