चाय के साथ-साथ कुछ कवितायें भी हो जाये तो क्या कहने...

Tuesday, September 10, 2013

कहानी की कविता

दोस्तों एक कहानी लिखी है "एक अकेली" कहानी के भीतर की कविता यहाँ प्रस्तुत है ये खत कहानी की नायिका सौम्या ने अपने प्रेमी शेखर को लिखा था उसी खत का थोड़ा सा अंश प्रस्तुत है...

आज पहली बार चली हूँ दो कदम

तुम्हारे बिन

आज पहली बार कुछ किया है मैने

तुमसे कहे बिन

तुम्हारी नाराजगी या तुम्हारी हाँ की

परवाह किये बगैर

प्यार में हद से ज्यादा परवाह कहीं

बंदिशे तो नहीं...

शायद आज तुम भी सोच पाओगे जीना

मेरे बिन

पहल मैने कर दी है और शुरुआत भी

मेरी ही थी....
सुनीता शानू

6 comments:

  1. हर किसी की एक नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएँ

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  2. सादर प्रणाम !
    ये शुरुवात तो कभी न कभी होनी थी |
    “अजेय-असीम "

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  3. कितना अच्छा लगता है ना बन्दिशों के घेरे से निकल कर एक स्वछंद जीवन जीना। वैसे भी भावुक बन्धन इन्सान को कमजोर बना देते है।

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  4. किसी कवि की रचना देखें,
    दर्द छलकता, दिखता है !
    प्यार, नेह दुर्लभ से लगते ,
    शोक हर जगह मिलता है !
    क्या शिक्षा विद्वानों को दें ,रचनाओं में, रोते गीत !
    निज रचनाएं,दर्पण मन की, दर्द समझते, मेरे गीत !

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  5. Ek Sachhi प्यार की कहानी Ka Varnan Jab Koi Karta Hai Dil Bhar Aata Hai. Being in love is, perhaps, the most fascinating aspect anyone can experience.

    Thnak You.

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  6. इतनी सुंदर और सटीक कविता लिखने के लिए साधुवाद

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