चाय के साथ-साथ कुछ कवितायें भी हो जाये तो क्या कहने...

Thursday, March 17, 2011

तुम्हारे बगैर



मुश्किल होगा
तुम्हारे बिन जीना
कल्पना करना भी
पाप होगा शायद
तुम जानते हो सब...
बच्चों की कसम भी
खा गई थी वो...

आँखों में आँसू
दिल में हलचल कि
कैसे कटेगी
वासंती उम्र
कैसे पूरी होंगी
तमाम ख्वाहिशे
तुम्हारे बगैर...

किन्तु,परन्तु सभी शब्दों ने
झकझोर कर रख दिया
कि अचानक
किसी ने
कंधा थपथपाया

जाने वाले के साथ भी
भला कोई जाता है।
तुम्हे जीना ही होगा
खुद के लिये
सँवरना ही होगा
और
दायित्व की जंजीरों ने
जकड़ लिया
इस कदर कि
खा गई वह
फ़िर एक बार
बच्चों की कसम
जी ही लेगी
अब
तुम्हारे बगैर...

33 comments:

  1. यही जीजीविषा है,
    जो न जीने देती,
    न मरने देती।

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  2. jeena hai , apne pratiroop ko sanwarne ke liye , ghumphirke yahi zindagi hai

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  3. जीना इसी का नाम है

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  4. जाने वाले के साथ भी
    भला कोई जाता है।
    तुम्हे जीना ही होगा
    खुद के लिये
    सँवरना ही होगा
    कई बार जीना मुश्किल होता हे, लेकिन फ़िर भी जीना पडता हे, बहुत भावूक रचना, धन्यवाद

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  5. बहुत भावपूर्ण...

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  6. बेहद सुन्दर यही जिंदगी का वलय है... जो घूमता रहता है... जीवन समेटे बढ़ाते हुवे ... सुन्दर कविता ..

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  7. यही ज़िंदगी है ...सुन्दर , भावपूर्ण प्रस्तुति

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  8. very nice....kitne dino baad...!!

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  9. अत्यंत भावपूर्ण रचना ,बधाई

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  10. अच्छी कविता !
    संवेदना से भरपूर !
    सशक्त अभिव्यक्ति !
    बधाई !
    **************
    दायित्व की जंजीरों ने
    जकड़ लिया
    इस कदर कि
    खा गई वह
    फ़िर एक बार
    बच्चों की कसम
    जी ही लेगी
    अब
    तुम्हारे बगैर...

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  11. कैसे पूरी होंगी तमाम ख्‍वाहिशें तुम्‍हारे बगैर... बहुत खूब। होली की शुभकामनाएं।

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  12. बहुत दिनो बाद इधर आना हुआ और चंचल शानू को गंभीर मुद्रा में देखा.... अर्थपूर्ण कविता...

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  13. भावुक कर गई आपकी सुन्दर रचना.

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  14. नारी तुमे हो प्रतिरूप,

    उस महामहिम का,

    जो रहता है हम सब के बीच,

    परन्तु दिखाई नहीं देता,

    कठिन काम वो तुम से ही कराता है,

    किसी को दुलार तो कहीं संवेदना पहुंचाता है,

    किसी को शक्ती देता है तो कहीं हिम्मत बंधाता है,

    प्रेम करना भी तो वो तुम्हे ही सिखाता है,

    चट्टान सा अडिग, आसमान सा असीम,

    वो तुम्हे ही बनाता है,

    तुम ही हो उसका मूर्त रूप,

    पल पल याद दिलाता है |

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  15. भावों से लबरेज़.

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  16. अत्यंत भावपूर्ण रचना| धन्यवाद|

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  17. tera sara jeevan maun gaya hai paglee!
    jaane waale ke sang kaun gaya hai paglee!
    ro-ro kar halkaan n hona ab tu,
    maa-baabu ka maan n khona ab tu!!!!

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  18. बेहद दर्द है इन शब्दो मे.बहुत ही अच्छी रचना!

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  19. धार्मिक मुद्दों पर परिचर्चा करने से आप घबराते क्यों है, आप अच्छी तरह जानते हैं बिना बात किये विवाद ख़त्म नहीं होते. धार्मिक चर्चाओ का पहला मंच ,
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  20. bahut khub...........jina tho hoga har haal mei...kaise bhi ho

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  21. भावपूर्ण

    सुनीताजी आपको वैवाहिक वर्षगाँठ की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

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  22. duniya me aayen hain to jeena hi parega...:)

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  23. सुनीता जी आपके ब्लॉग पर आकर बहुत अच्छा लगा. आपसे अनुरोध है की भारतीय ब्लॉग लेखक मंच से भी जुड़े और सहयोग करे. editor.bhadohinews@gmail.com

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  24. http;//shayaridays.blogspot.com

    mujhe apka blog bahut bahut pasand aaya

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  25. यही तो जिंदगी है, वरना जीवन तो निरर्थक सा प्रतीत होता है

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  26. बहुत ही खूबसूरत भाव हैं।

    सादर

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  27. यही है ज़िन्दगी और उसके सच जिनसे मूंह नही मोडा जा सकता।

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  28. वाह ...बहुत ही बढि़या ..।

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  29. yahi is jeewan ka yatharth hai. bahut samvedansheel rachna.

    agar iska sheershak 'baccho ki kasam' hota to kaisa lagta ?

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  30. बहुत बढ़िया....

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स्वागत है आपका...