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होली पर इससे खूबसूरत और कुछ नहीं पढ़ा | एक दिन सामने रूबरू सुनेंगे आपको
ReplyDeleteहां अजय 18 के बाद हम सब मिलते हैं, ब्लाग पर मीटिंग के लिए।
Deleteबढ़िया दोहे।
ReplyDeleteकभी तो दूसरों के ब्लॉग पर भी अपनी टिप्पणी दिया करो।
This comment has been removed by the author.
ReplyDeleteअति सुंदर, सरस एवं मनोरंजक गीत। यह काव्य पढ़कर ही आनन्द उठा रहे हैं। क्योंकि कोरोना के भय से इस वर्ष होली-रंग-गुलाल के सारे कार्यक्रम बंद कर दिए गए।
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