चाय के साथ-साथ कुछ कवितायें भी हो जाये तो क्या कहने...

Tuesday, April 21, 2020

चंद बासी रोटियां

चंद बासी रोटियां
किसी बासी याद की तरह
पड़ी रही थी रात भर
छुआ तो लगा कि
कुछ नमी सी है अभी
शायद रात-भर रोई थी
या इनकी गर्मी ही
इनपर बरस रही थी पानी बनकर
जो बचाए हुए थी सुबह तक
इनको कठोर होने से
मैंने भी बासी रोटियां उठाई
सहलाई कि जाया नहीं होने दूंगी इनकी ख़ुशबू
बचा लूंगी इनकी नमी को
जैसे कुछ रिश्तों को बचाने की कोशिश भी
करती रहती हूं मैं
नमी सूखने और कठोर होने तक।
सुनीता शानू

9 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 21 एप्रिल 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (22-04-2020) को  "देश में टेलीविजन इतिहास की   कहानी लिखने वाला दूरदर्शन "   (चर्चा अंक-3678)    पर भी होगी। -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    कोरोना को घर में लॉकडाउन होकर ही हराया जा सकता है इसलिए आप सब लोग अपने और अपनों के लिए घर में ही रहें।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (22-04-2020) को  "देश में टेलीविजन इतिहास की   कहानी लिखने वाला दूरदर्शन "   (चर्चा अंक-3678)    पर भी होगी। -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    कोरोना को घर में लॉकडाउन होकर ही हराया जा सकता है इसलिए आप सब लोग अपने और अपनों के लिए घर में ही रहें।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 

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  4. बहुत अच्छी कविता के लिए साधुवाद । सांध्य दैनिक "मुखरित मौन में" में इस कविता की अनुगूँज तथा डॉ रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" जी की चर्चा में सम्मिलित होने के लिए बहुत बहुत बधाई-अभिनंदन ।

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  5. जैसे कुछ रिश्तों को बचाने की कोशिश भी
    करती रहती हूं मैं
    नमी सूखने और कठोर होने तक।
    बहुत बढ़िया सुनीता जी !

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  6. मन में नमी हो तो हर बासी चीज़ फिर चाहे रिश्ते हों या रोटी ... बची रहती है ...

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  7. रोटी हो या रिश्ते थोड़ी नमी तो बचा कर ही रखनी होती है ताकि नष्ट न हो. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण कविता.

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  8. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण कविता !!

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स्वागत है आपका...

अंतिम सत्य