चाय के साथ-साथ कुछ कवितायें भी हो जाये तो क्या कहने...
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Thursday, March 17, 2011

तुम्हारे बगैर



मुश्किल होगा
तुम्हारे बिन जीना
कल्पना करना भी
पाप होगा शायद
तुम जानते हो सब...
बच्चों की कसम भी
खा गई थी वो...

आँखों में आँसू
दिल में हलचल कि
कैसे कटेगी
वासंती उम्र
कैसे पूरी होंगी
तमाम ख्वाहिशे
तुम्हारे बगैर...

किन्तु,परन्तु सभी शब्दों ने
झकझोर कर रख दिया
कि अचानक
किसी ने
कंधा थपथपाया

जाने वाले के साथ भी
भला कोई जाता है।
तुम्हे जीना ही होगा
खुद के लिये
सँवरना ही होगा
और
दायित्व की जंजीरों ने
जकड़ लिया
इस कदर कि
खा गई वह
फ़िर एक बार
बच्चों की कसम
जी ही लेगी
अब
तुम्हारे बगैर...

Wednesday, January 9, 2008

माँ की व्यथा

दोस्तों मेरी यह कविता १३ तारीख को रेडियो द्वारा राष्ट्रीय प्रसारण दिल्ली केंद्र से प्रसारित होगी...रेडियो या अखबार जिसे शायद आज सब भूल गये हैं मगर हर खासोआम के दिल तक पँहुचता है आज भी रेडियो और अखबार...:) ... कृपया आज ही खरीद कर लाईये एक छोटा सा रेडियो और सुनिये आपके प्रिय कवि की दर्द भरी कविता...:)

देख कर लाल की खूबसूरत छवि,
मन ही मन बावरी मुस्काती रही,
डर न जाये कहीं मेरा लाडला...
मुँह आँचल से अपना छिपाती रही।


मगर एक दिन ये हवा जो चली,
ले उड़ी आँचल वो पकड़ती रही,
देख कर लाल तो डर ही गया...
मै माँ हूँ... तेरी वो बताती रही।


पोंछ कर आँसू आँखे छिपाती रही,
खुद को नजरों से खुद की गिराती रही,
आँसूओं लग न जाये बददुआ लाल को,
दोनो हाथों को दुआ में उठाती रही।


छोड़ कर गया वो राह तकती रही,
देर तक वो रोती सिसकती रही,
एक दिन तो आ जाना मेरे लाडले,
हर साँस में आस एक पलती रही।


याद में पुत्र की साँसे चलती रही,
आत्मा भी मिलन को तड़पती रही,
अन्तिम समय आ गया जानकर...
आँसुओ से चिट्ठी वो लिखती रही।


-
मेरे लाल जान ले मजबूरी मेरी-
उम्र भर जिस चेहरे से तूने नफ़रत करी,
एक रोज बचाने तूझे आग से...
जल गई थी ये सूरत मेरी।


खुद जलकर भी खुद को बचाती रही,
अपनी आँखों से दुनियाँ दिखाती रही,
मै खुश हूँ मै हर पल तेरे साथ थी,
तेरी आँखों मे मै सदा मुस्काती रही।


खत पढ़ा पढ़कर आँखें ही रोती रही,
आत्मा पुत्र की माँ को बिलखती रही,
जब तक माँ थी मै समझा नही...
इन आँखो से माँ दुनियां दिखाती रही।


माँ जैसी भी हो मेरे लाडलो,
जन्म जिसने दिया न नफ़रत करो,
सौ जन्मों में भी क्या चुका पाओगे,
कर्ज दूध का अदा क्या कर पाओगे,

बन कर लहू को रंगो में बहा...
कतरा-कतरा क्या उसको कर पाओगे-?


सुनीता चोटिया (शानू)

अंतिम सत्य