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| पँचवटी पिलानी राजस्थान |
वास्तविकता पर आधारित एक प्रकाशित रचना...
आज सब कुछ
बदला-बदला सा है,
उन रोती बिलखती आँखों में
नही है अंगारे
उन होठों पर
गाली भी नही है
हाँ दर्द झलक रहा है
दुनिया भर का दर्द
कि कैसे जीयेंगे हम
इन बच्चों का क्या होगा
हाय बाबूजी
हमे अनाथ कर गये
चीखे हवा में
कलाबाजियाँ खाने लगी
कि हवा भी
आदमी के दोगलेपन से
बरगलाने लगी
बूढ़ा मरता क्यूँ नही
खाँसता रहता है रात भर
न दिन में चैन
न रात मे आराम
बच्चे भी परेशान
हे भगवान ये
कब जायेगा शमशान
जाने क्यों समझता ही नही
बूढ़ा मरता ही नही....।














