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इतिहास ने फ़िर धकेलकर, कटघरे में ला खड़ा किया... अनुत्तरित प्रश्नो को लेकर, आक्षेप समाज पर किया॥ कन्यादान एक महादान है, बस कथन यही एक सुना... ...
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यूँ हीं आई जब याद बात कोई तो कागज़ पर कलम फ़िर चल पड़ी.... आधी बात कही थी तुमने और आधी मैने भी जोड़ी तब जाकर बनी तस्व...
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तुम जब भी उदास होते हो मै उन वजहों को खोजने लगती हूँ जो बन जाती है तुम्हारी उदासी की वजह और उन ख़ूबसूरत पलों को याद करती हूँ जो...

होली पर इससे खूबसूरत और कुछ नहीं पढ़ा | एक दिन सामने रूबरू सुनेंगे आपको
ReplyDeleteहां अजय 18 के बाद हम सब मिलते हैं, ब्लाग पर मीटिंग के लिए।
Deleteबढ़िया दोहे।
ReplyDeleteकभी तो दूसरों के ब्लॉग पर भी अपनी टिप्पणी दिया करो।
This comment has been removed by the author.
ReplyDeleteअति सुंदर, सरस एवं मनोरंजक गीत। यह काव्य पढ़कर ही आनन्द उठा रहे हैं। क्योंकि कोरोना के भय से इस वर्ष होली-रंग-गुलाल के सारे कार्यक्रम बंद कर दिए गए।
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