आज कविता नही बस एक गुजारिश है आप इसे अवश्य पढ़े...
http://mereerachana.blogspot.com/2011/07/blog-post_10.html
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इतिहास ने फ़िर धकेलकर, कटघरे में ला खड़ा किया... अनुत्तरित प्रश्नो को लेकर, आक्षेप समाज पर किया॥ कन्यादान एक महादान है, बस कथन यही एक सुना... ...
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यूँ हीं आई जब याद बात कोई तो कागज़ पर कलम फ़िर चल पड़ी.... आधी बात कही थी तुमने और आधी मैने भी जोड़ी तब जाकर बनी तस्व...
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तुम जब भी उदास होते हो मै उन वजहों को खोजने लगती हूँ जो बन जाती है तुम्हारी उदासी की वजह और उन ख़ूबसूरत पलों को याद करती हूँ जो...
आभार।
ReplyDeleteअभी पढते हैं।
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कवि सजीव सारथी जी को बधाई,
ReplyDeleteविवेक जैन vivj2000.blogspot.com